Principal's Message

Principal

 

 

 

महाविद्यालय में प्रवेश लेने वाली प्रत्येक छात्रा का एक सपना होता है, एक लक्ष्य होता है, एक उद्देष्य होता है जिसे क्रियान्वित करने हेतु छात्रा महाविद्यालय में प्रवेश लेती है। उसके इसी सपने को उचित दिशा देने तथा महर्षि दयानन्द सरस्वती की नारी शिक्षा की अवधारणा को चरितार्थ करने की दृष्टि से जुलाई 1995 में वैदिक बालिका महाविद्यालय की स्थापना की गई। तब से आज तक यह संस्था महिला शिक्षा के प्रसार के साथ ही नारी सशक्तिकरण की दिशा में निरन्तर प्रयत्नशील है। वर्तमान समय कठोर प्रतिस्पर्धा का समय है। हमारा मूल उद्देष्य चरित्रवान ऊर्जावान परिश्रमी, संघर्षशील व्यक्तित्व वाली छात्रा तैयार करना है जो प्रतिस्पर्धात्मक जीवन की प्रतियोगिता में निरन्तर सफलता प्राप्त करे। वैदिक बालिका पी.जी.महाविद्यालय अन्य महाविद्यालय से इस अर्थ में एक कदम आगे है, कि यहां कि प्राध्यापिकायें अपनी छात्राओं की उन्नति में व्यक्तिगत रूचि लेकर उन्हें निरन्तर सफलता की ओर प्रेरित करती है। समय-समय पर विभिन्न कम्पनियों की और से प्लेसमेंट आयोजित कर छात्राओं के रोजगार के लिए प्रयत्नशील रहती है तथा विशेष रूचि लेती है। हमारा विश्वास है आज के प्रतिस्पर्धा पूर्ण समय में जा सारस्वत परिवेश छात्राओं को सुलभ होना चाहिए वह इसी महाविद्यालय में मिल सकता है। जीवन के निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति में यह महाविद्यालय छात्राओं का सतत् मार्गदर्शन करेगा तथा जीवन में उन्नति के लिए संजोये सपनों को साकार करेगा।

इसके अतिरिक्त खेल-कूद व सांस्कृतिक कार्यक्रमों जैसी शिक्षणेत्तर गतिविधियों व एन.सी.सी., एन.एस.एस., के माध्यम से छात्राओं के समग्र विकास में भी हम योगदान देते रहते है। महाविद्यालय में प्रवेश लेने वाली छात्राओं से हमारी इतनी ही अपेक्षा है कि वे संस्था के आदर्शों को ध्यान में रखते हुए निष्ठापूर्वक अध्ययन करें तथा संस्था की शिक्षणेत्तर गतिविधियों में समय-समय पर सक्रिय भाग ले। सत्रारम्भ पर आप सभी का हार्दिक स्वागत और आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनायें।

धनश्याम धर त्रिपाठी
प्राचार्य