Secretary's Message

Secretary

 

 

 

महर्षि दयानन्द सरस्वती भारत वर्ष में नारी शिक्षा के सूत्रधार थे। महर्षि के आविर्भाव से पूर्व हमारे देश में “स्त्री शूद्रो न धीयताम्“, अर्थात् नारी व शूद्र को पढ़ने का अधिकार नहीं है, की स्थिति थी। नारी की दशा अत्यन्त शोचनीय थी व स्त्री को पुरूष के समकक्ष अधिकार प्राप्त नहीं थे। महर्षि ने प्राचीन आर्यावर्त में प्रचलित वैदिक धर्म के सिद्धांतो को पुनः प्रतिष्ठापित करते हुए ईश्वरकृत ग्रन्थ वेदों के उद्धरणों से यह स्पष्ट किया कि नारी को भी पढ़ने का समान अधिकार प्राप्त है। नारी शिक्षा के प्रसार में आर्य समाज की भूमिका हमारे देश के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से मंडि़त है। शिक्षा के प्रचार-प्रसार में आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा अनेकानेक महती कार्य यथा नारी शिक्षा, दहेज प्रथा उन्मुलन, बाल-विवाह निषेध, विधवा विवाह आदि उस युग में सम्पादित किए गए जबकि सम्पूर्ण भारतवर्ष अज्ञानता, पाखंड व रूढि़वाद के अंधकार में डूबा हुआ था। इन समस्त बुराईयों से उबरने की एक मात्र किरण नारी शिक्षा के प्रसार में ही निहित थी।

अतः नारी शिक्षा के महान यज्ञ में आर्य समाज के प्रचारकों व निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार आषाढ़ शुक्ल नवमीं संवत् 2051 तद्नुसार 7 जुलाई 1995 को जयपुर शहर के उपनगर मानसरोवर में वैदिक बालिका महाविद्यालय के रूप में अपनी आहुति प्रदान की। दूरस्थ स्थानों यथा मानसरोवर, सांगानेर, वैशाली नगर, त्रिवेणी नगर, सोडाला, दुर्गापुरा आदि अनेक कॉलोनियां में रहने वाली छात्राओं की आवागमन व अध्ययन की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इस महाविद्यालय का शुभारम्भ किया गया। इन दूरस्थ स्थानों पर सर्वप्रथम वैदिक बालिका महाविद्यालय ने ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्राओं को अध्ययन की सुविधा विज्ञान, वाणिज्य व कला संकायों में उपलब्ध कराई। इस महाविद्यालय की स्थापना से इन उपनगरों में रहने वाले अभिभावकों ने राहत की सांस ली व अपनी पुत्रियों की उच्च शिक्षा की कठिनाई से भी मुक्त हुए।

आज यह महाविद्यालय निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर है एवं नित नए विषय नए युग की मांग के अनुसार छात्राओं को उपलब्ध कराने हेतु प्रयत्नशील भी।

वर्तमान महाविद्यालय के कला संकाय में 12 विषय, विज्ञान में 4, वाणिज्य में 3 विषयों में अध्यापन कराया जा रहा है। जयपुर के गिने चुने महाविद्यालय जिनमें गृहविज्ञान संकाय (बी. एससी. गृहविज्ञान) में अध्ययन कराया जाता है उनमें वैदिक बालिका पी.जी. महाविद्यालय का प्रमुख स्थान है।

वर्तमान में महाविद्यालय स्नाताकोत्तर स्वरूप ग्रहणकर चुका है। महाविद्यालय में स्नातकोत्तर स्तर पर विज्ञान संकाय में रसायन शास्त्र, प्राणिशास्त्र, वनस्पति शास्त्र, भूगोल व गृहविज्ञान संकाय में Food & Nutrition में स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययन हो रहा है। कला संकाय में स्नातकोत्तर स्तर पर चित्रकला, संगीत, राजनीति शास्त्र, लोक प्रशासन, समाज शास्त्र व भूगोल विषयों में अध्ययन की सुविधा उपलब्ध है।

यह महाविद्यालय राजस्थान विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है। हमारे व्याख्याता योग्य एवं अनुभवी होने के साथ ही अपने उत्तरदायित्वों के प्रति समर्पित है। महाविद्यालय प्रशासन एवं प्रबन्ध छात्राओं के बौद्धिक, शारीरिक एवं नैतिक विकास में रूचि रखते हुए सर्वतोमुखो विकास के लिए उन्हें प्रेरित एवं प्रोत्साहित करना कर्तव्य मानता है। हमारा प्रयास है कि हम शिक्षा जगत में अपना एक विषिष्ट स्थान बनाये एवं इसके लिए महाविद्यालय की प्रबन्ध समिति सतत् प्रयासरत् है।

चक्रकीर्ति सामवेदी